आज-कल के प्यार में ना हया ना उसूल है,
करना किसी से उम्मीद-ए-वफ़ा फ़िजूल है,
जिसकी चाहत की चाह में तुम रो रहे हो..,
वो किसी और को ख़ुश करने में मशगूल है !
Aaj-kal ke pyar mein na haya na usool hai,
Karna kisi se ummid-e-wafa fijool hai,
Jiski chahat ki chah mein tum ro rahe ho..,
Woh kisi aur ko khush karne mein mashgool hai !
- हया - लज्जा, शर्म, लाज
- उसूल - नियम, कायदा, कानून
- मशगूल - व्यस्त, कार्य में लगा हुआ
- Article By. Dharm_Singh
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