हर रात की क़िस्मत में चमकता महताब नहीं हुआ करता,
हर कली की तक़दीर में खिलता गुलाब नहीं हुआ करता,
कुछ बदनसीब अभागे ऐसे भी हुआ करते हैं मेरे दोस्त...,
मुक़म्मल जिनका हमसफ़र का "ख़्वाब" नहीं हुआ करता !
Har raat ki kismat mein chamakta mehtab hua karta,
Har kali ki taqdeer mein khilta gulab nahin hua karta,
Kuch badnaseeb abhage aise bhi hua karte hain mere dost...,
Mukammal jinka humsafar ka "khwab" nahin hua karta !
- महताब - चाँद, चंद्रमा
- मुक़म्मल - पूरा, पूर्ण
- हमसफ़र - जीवन साथी
- Article By. Dharm_Singh
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