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Zindagi jeene ki shayari...

Zindagi_jeene_ki_shayari


सुकून से सोने के लिए महज़ रात का और आँखों का होना ही काफ़ी नहीं, नींद भी होनी चाहिये,
और ज़िन्दगी जीने के लिए फ़क़त साँसों का सिलसिला ही काफ़ी नहीं, कोई उम्मीद भी होनी चाहिये !

Sukoon se sone ke liye mahaz raat kaa aur aankhon kaa hona hee kaafi nahin, neend bhi honi chaahiye,
Aur zindagi jeene ke liye faqat saanson kaa silsila hee kaafi nahin, koi ummid bhi honi chaahiye !



  • महज़ - केवल, सिर्फ़, मात्र
  • फ़क़त - बस इतना ही, केवल, सिर्फ़
  • सिलसिला - कड़ी, क्रम, पंक्ति, श्रंखला

  • Article By. Dharm_Singh

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