हमदर्दी की आड़ में बेदर्दी से जज़्बातों का मज़ाक उड़ाते हैं लोग,
जिन्हें तुम रो-रोकर सुनाते हो वही हमें हँस-हँसकर सुनाते हैं लोग !
Humdardi ki aad mein bedardi se jazbaton kaa mazaak udaate hain log,
Jinhen tum ro-rokar sunate ho wahee humen hans-hanskar sunate hain log !
- Article By. Dharm_Singh
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