ऐ ज़िन्दगी देने वाले कुछ तो तरस खाया होता,
दर्द ही देना था तो पत्थर दिल भी बनाया होता,
हँसते-हँसते सह लेता मैं तेरा हर ज़ुल्म-ओ-सितम,
सज़ा से पहले मुझें मेरा गुनाह तो बताया होता !
Aye zindagi dene wale kuch toh taras khaya hota,
Dard hee dena tha toh patthar dil bhi banaya hota,
Hanste-hanste sah leta main tera har zulm-o-sitam,
Saza se pahle mujhen mera gunah toh bataya hota !
- Article By. Dharm_Singh
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