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4 line hindi shayari...

4_line_hindi_shayari


जो हुआ ना अब से पहले वो अब हो नहीं सकता,
खुली आँखों से कभी कोई सो नहीं सकता,
क्यूँ करूँ मैं ज़माने से अदावत और बग़ावत,
मुझें इल्म है मैं अपनी ही लाश पे रो नहीं सकता !

Jo huaa na ab se pahle woh ab ho nahin sakta,
Khuli aankhon se kabhi koi so nahin sakta,
Kyun karun main zamane se adawat aur bagawat,
Mujhen ilm hai main apni hee laash pe ro nahin sakta !



  • अदावत - शत्रुता, दुश्मनी, बैर, विरोध
  • बग़ावत - विद्रोह, अराजकता, अशांति
  • इल्म - ज्ञान, जानकारी, तालीम, विद्या

  • Article By. Dharm_Singh

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