पहले गीत वफ़ा के गाता था अब नग़मे बेवफ़ाई के गुनगुना रहा हूँ मैं...,
डुबोकर ग़म की स्याही में दर्द की कलम दास्ताँ-ए-दिल कागज़ को सुना रहा हूँ मैं !
Palhle geet wafa ke gaata thaa ab nagame bewafai ke gunguna rahaa hoon main...,
Dubokar gum ki syahee mein dard ki kalam dastan-e-dil kaagaj ko suna rahaa hoon main !
- Article By. Dharm_Singh
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