हर रोज़ नई-नई महफ़िलें सजती है मेरे यार इन बेवफ़ाओं के दरबार में,
वफ़ादार तो अक्सर तन्हा ही मिलते हैं कभी मयख़ाने तो कभी बार में !
Har roz nayi-nayi mehfilen sajti hai mere yaar in bewafaon ke darbar mein,
Wafadar toh aksar tanha hi milte hain kabhi maykhane toh kabhi baar mein !
- महफ़िल - सभा, समारोह, जलसा, मजलिस, बज़्म, अंजुमन, मजमा
- मयख़ाना - शराब खाना, मधुशाला, मदिरालय, शराब पीने का स्थान
- Article By. Dharm_Singh
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