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Mehfil shayari...

Mehfil_shayari


हर रोज़ नई-नई महफ़िलें सजती है मेरे यार इन बेवफ़ाओं के दरबार में,
वफ़ादार तो अक्सर तन्हा ही मिलते हैं कभी मयख़ाने तो कभी बार में !

Har roz nayi-nayi mehfilen sajti hai mere yaar in bewafaon ke darbar mein,
Wafadar toh aksar tanha hi milte hain kabhi maykhane toh kabhi baar mein !



  • महफ़िल - सभा, समारोह, जलसा, मजलिस, बज़्म, अंजुमन, मजमा
  • मयख़ाना - शराब खाना, मधुशाला, मदिरालय, शराब पीने का स्थान

  • Article By. Dharm_Singh

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