ख़ुद को ना तुम कभी ख़ुद से शर्मिंदा रखना,
हालात बिगड़े तो बिगड़े ज़मीर ज़िंदा रखना !
Khud ko na tum kabhi khud se sharminda rakhana,
Haalat bigade toh bigade zameer zinda rakhana !
- शर्मिंदा - लजाने वाला, लज्जित, शर्मसार, नादिम
- ज़मीर - आत्मा, अंत:कारण, हृदय, मन, विवेक, दिल
- Article By. Dharm_Singh
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