Advertisement

Ummid shayari hindi...

Ummid_shayari_hindi


आह पर आह बेहिसाब भरता हूँ,
हर रोज तेरे आने की मुसलसल राह तकता हूँ,
न जाने किस घड़ी आ आओ तुम लौटकर,
इसी उम्मीद में मुक़म्मल रात जगता हूँ !

Aah par aah behisab bharta hoon,
Har roj tere aane ki musalsal raah takta hoon,
Na jaane kis ghadi aa jaao tum lautkar,
Isi ummid mein mukammal raat jagta hoon !



  • मुसलसल - लगातार, निरंतर, सतत, क्रमबद्ध
  • मुक़म्मल - संपूर्ण, पूर्ण, पूरा, समग्र

  • Article By. Dharm_Singh

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ