आह पर आह बेहिसाब भरता हूँ,
हर रोज तेरे आने की मुसलसल राह तकता हूँ,
न जाने किस घड़ी आ आओ तुम लौटकर,
इसी उम्मीद में मुक़म्मल रात जगता हूँ !
Aah par aah behisab bharta hoon,
Har roj tere aane ki musalsal raah takta hoon,
Na jaane kis ghadi aa jaao tum lautkar,
Isi ummid mein mukammal raat jagta hoon !
- मुसलसल - लगातार, निरंतर, सतत, क्रमबद्ध
- मुक़म्मल - संपूर्ण, पूर्ण, पूरा, समग्र
- Article By. Dharm_Singh
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