दिल तो आज भी तरसता है गुफ़्तगू तुमसे करने को,
बस अब हिम्मत नहीं रही ख़ुद को और ज़लील करने की !
Dil toh aaj bhi tarasta hai guftgoo tumse karne ko,
Bas ab himmat nahin rahi khud ko aur zalil karne ki !
- गुफ़्तगू - बात-चीत, वार्तालाप, बातें करना
- ज़लील - अपमानित, बेईज्ज़त, तिरस्कृत
- Article By. Dharm_Singh
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