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Himmat shayari...

Himmat_shayari


दिल तो आज भी तरसता है गुफ़्तगू तुमसे करने को,
बस अब हिम्मत नहीं रही ख़ुद को और ज़लील करने की !

Dil toh aaj bhi tarasta hai guftgoo tumse karne ko,
Bas ab himmat nahin rahi khud ko aur zalil karne ki !



  • गुफ़्तगू - बात-चीत, वार्तालाप, बातें करना
  • ज़लील - अपमानित, बेईज्ज़त, तिरस्कृत

  • Article By. Dharm_Singh

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