गैरों से क्या गिला करें हम यहाँ तो अपने ही ग़ैर होकर बैठे हैं,
मेरी मौत का "जश्न" मनाने को वो अपना मुँह धोकर बैठे हैं !
Gairon se kya gila karen hum yahan toh apne hi gair hokar baithe hain,
Meri maut ka "jashn" manane ko woh apna munh dhokar baithe hain !
- Article By. Dharm_Singh
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