
कभी बुझने ना देना तुम, अपनी उम्मीदों का दिया, सुना है कभी-कभी वक़्त, बे-वक़्त बदल जाता है ! Kabhi bujhne naa dena tum, ap…
Read more »वो किस क़दर सुबक-सुबक कर रोया होगा, पाकर जिसने किसी को फिर से खोया होगा ! Woh kis qadar subak-subak kar roya hoga, Pakar…
Read more »बड़ा बेरहम बेदर्द ही होगा वो, जिसने मेरी ऐसी तक़दीर लिखी है, हर ख़ुशी के बदले, फ़क़त ग़मों की मुक़म्मल जागीर लिखी है ! Bada be…
Read more »आख़िर में जब सबको मिट्टी ही होना है, तो फिर किस लिए इतना रोना धोना है, गहरी नींद तो उसी बिस्तर पर आएगी.., जिसमें ना कोई …
Read more »खुदगर्ज ज़माने की, खुदगर्ज़ी के बग़ैर, मैं चाहता हूँ, कोई चाहे मुझें मेरी मर्ज़ी के बग़ैर ! Khudgarz zamane ki, khudgarzi ke…
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